तेरी मेहरबानियाँ

तेरी मेहरबानियाँ

तेरी मेहरबानियाँ तो हैं दाता अनगिनत

मेरी गलतियों  का  भी तो नहीं  है कोई अन्त

 

ना ही  मेरे जैसा कोई गुनहगार  है

और ना तेरे जैसा कोई  बक्शनहार  है

 

 

तेरी मेहर तो हम सब पे  दाता अपरम्पार है

तेरी  शिक्षा पर चलना ही इस जीवन का आधार है

 

करते हैं गुनाह इक दिन में हम तो कई हज़ार

चाह कर भी हम  तो नहीं  हैं  सकते तेरे कर्ज़ उतार

 

अनजाने में ही दुखा देते हैं  दिल किसी का भी

फिर भी  उसका दिल वद्दुआ  ना दे कभी भी

 

ऐसा ही असर है आपकी मेहेरबानी का

हम झुक के करें सजदा  हमेशा इनका

 

 

देता है तू वो सबको  जो हो उसके लिए गुणवान

फिर भी नहीं  करता है शुकराना तेरा यह  इंसान

 

मन का तो  काम है मुझे  माया में उलझाना

पर मेरा तो कर्म  ही  होगा  सबसे बड़ा खजाना

 

मोह माया को त्याग कर जो इंसान तेरी शरण में आएगा

तुझसे तुझको जान  कर निश्चित ही मुक्ति पायेगा

 

लगाता है सबको गले से तू नहीं देखता किसी की ख़ामियाँ

कैसे करू ब्यान मैं दाता अनगिनत हैं  तेरी मेहरबनियाँ

 

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