बच्चपन-2

चला गया बच्चपन अब ज़बानी का आग़ज हुआ ,
शुरु एक नया अध्याय हुआ ,धीरे धीरे बुधि का बिकास हुआ ,
कोमल तन का रूप यूँ बदला ,एक नये जोश का अबतार हुआ
पहले स्कूल ,फिर कालेज ,तब बढ़ने लगा जर्नल नालेज  ,
पहले माँ ,बाप ,दोस्त ,फिर सीधा घर से पंहुचा हास्टल ,
बनने लगे न्यू न्यू दोस्त अब ,ख़ुशी  का एहसास हुआ,
अब शुरु हुआ हास्टल साथ मैं खुलनी शुरु हुई बियर की बोतल ,धुएं का अम्बार हुआ ,

 

जो ऊँगली पकड कर चलता था कभी बात बात पर डरता था ,
देख कर सुंदर मुखड़ा ,इक लड़की से प्यार हुआ ,
बातें अब बो बनाने लगा था ,सचाई माँ बाप से छुपाने लगा था ,
खर्चाअब बढने लगा था ,बाईक के लिये पापा से लड़ने लगा था ,
ये डिमांड भी हुई पूरी ,पीछे बैठा अब अपना प्यार था ,ओर हबा पे सबार था ,

 

मैडम धिरे से बोली ,जुयुं मीठी गोली ,बाबु थोड़ा ब्रेक तो लगाओ ,
भूख लगी है ,पिजा तो खिलाओ ,बाबु पड़ा है कुछ सोच में ,
ये तो काम है इसका रोज का ,अभी तो शोपिंग है बाकी,पर बाबु की तो जेब तो है खली ,
सब दोस्तों से मांगे पैसे ,तो सब जगह से मिली गाली ,

 

एटीएम खाली ,क्रेडिटकार्ड  का  भी दिबाला निकला ,मेरा प्यार तो साला मतलब बाला निकला ,
अब धीरे धिरे धुन्दला होने लगा प्यार ,मैडम ने भी देखा मोका ,अब बो हुई कार में सबार ,
उस की याद मे सुलगाई सिगरेट ,दारू का सेलाब आया , दिल को समझाया ,
ये बाली तो निकली मतलबी ,हम ने दूसरी को पटाया ,

 

बस कुछ यू निकली ज़बानी ,अब फोक्स किया पढाई पर ,सरकारी जॉब की लडाई पर,
मेहनत हमारी रंग लाई ,इक दिन हमारे घर भी इक सरकारी लेटर आई ,
फिर हुई शादी   ,दो बच्चे  कुछ साल बाद हुये ,ये सब ज़बानी के कमाल हुए  ,

 

बच्चपन-2 के साथ यह भी पढ़ें :-

  1. हमें भी प्यार हुआ था
  2. बच्चपन गरीब का
  3. बच्चपन गरीब का – 2
  4. मुस्कुराहट

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