घमण्डी हाथी और गौरैया

दोस्तों बहुत ऐसा होता है कि हमें अपनी किसी चीज़ पर घमण्ड हो जाता है। उस समय हम अपनी ही मदमस्ती में रहते हैं । हमें अपनी सिवाए कुछ भी दिखाई नहीं देता है । हम अपने घमंड में इतना चूर हो जाते हैं कि हमें दूसरों को हमारी वजह से होने वाली तकलीफ भी दिखाई नही देती है। हमारा यही रवैया कभी कभी हमारे लिए इतने भयंकर परिणाम  लेकर आता है जिनके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं होता है। ऐसा ही कुछ घटित हुआ एक घमण्डी हाथी के साथ। तो आईये चलते हैं इस कहानी की तरफ।

मधुमक्खी, कठफोड़ा , मेंडक, गोरैया और घमण्डी हाथी

एक समय की बात है । एक वन में एक गोरैया अपने पति के साथ आम के घने वृक्ष पर रहा करती थी। उसी वृक्ष पर एक कठफोड़ा भी रहता था। दूसरी दाल पर मधुमक्खियों  का  छत्ता भी था । पास में ही एक  तालाव था उसमें एक मेंडक अपने परिवार सहित रहता था । वे सभी पड़ोसी थे और एक दूसरे  के सुख दुःख में हमेशा काम आते थे ।

एक बार गौरैया ने अण्डे दिए । अब सारा दिन गौरैया अपने घोंसले में बैठकर अपने अण्डे सेती रहती थी और उसका पति उन दोनों के लिए खाने का इंतजाम करता था। वो दोनों बहुत खुश थे और उनको अण्डों से बच्चों के निकलने का इंतज़ार था ।

घमण्डी हाथी द्वारा जंगल की बर्बादी

एक दिन  गोरैया का पति भोजन की तालाश में दूर निकल गया था और गौरैया अपने घोंसले में अपने अण्डों को सेत रही थी । तभी बहां पर एक घमण्डी हाथी आ धमका । वो जंगल को तहस नहस करने लगा । वह उस वृक्ष के पास भी पहुँच गया जहाँ गोरैया, कठफोड़ा, और मधुमक्खियाँ रहा करते थे। सभी ने उसको बहुत समझाया के वो ऐसा ना करे । लेकिन हाथी को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था । वो कहता है कि मैं सबसे अधिक ताकतवर हूँ, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और उसने उस पेड़ की शाखाएं भी तोड़ डालीं ।

गोरैया के अण्डे नीचे गिरकर टूट गए और  वह रोने लगी । हाथी तालाब में जाकर नहाने लगा। जब गौरैया का पति भोजन लेकर वापस आया, तो उसने देखा कि उसकी पत्नी गौरैया हाथी द्वारा तोड़ी गई शाखा पर बैठी रो रही है। गौरैया ने बहां पर घटित पूरी घटना अपने पति को बताई, जिसे सुनकर उसके पति को भी बहुत दुख हुआ। तभी मधुमक्खी, कठफोड़ा और मेंडक भी बहां पर आ जाते हैं। वो सभी घमण्डी हाथी से बदला लेने की योजना बनाते हैं ।

मधुमक्खी, कठफोड़ा और मेंडक द्वारा गौरैया और जंगल की बर्बादी का घमण्डी हाथी से बदला

अपनी योजना के अनुसार सबसे पहले मधुमक्खी ने हाथी के कान में गुनगुनाना शुरू कर दिया।  हाथी मधुमक्खी की मधुर आवाज में खो गया, और मस्ती से नाचने लगा । जब हाथी अपनी मस्ती में नाच रहा था तभी कठफोड़े  ने आकर हाथी की दोनों आखें फोड़ डालीं। हाथी दर्द के मारे तडफने और  चिल्लाने लगता है । तभी मेंढक अपने परिवार के साथ आता है  और एक दलदल के पास टर्रटराने लगता है। हाथी को उस तरफ को तालाब समझकर भागना शुरू  करता है। वह देख नहीं पा रहा था और पानी पीना चाहता था, इसलिए भागा जा रहा था । इस प्रकार से हाथी दलदल में गिर जाता है  और अपने प्राणों से हाथ धो बैठता है । इस तरह चिड़िया ने मधुमक्खी, कठफोड़वा और मेंढक की मदद से हाथी से बदला ले लिया।

शिक्षा :-

दोस्तों  इस  कहानी से हमें एक तो  यह शिक्षा  मिलती है कि हमें कभी घमंड नहीं करना चाहिए । घमंड हमारे विनाश का कारण बनता है । और दूसरी यह कि  एकता और विवेक का उपयोग करके बड़ी से बड़ी मुसीबत को हराया जा सकता है।

 

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R.K.Jaswal

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