देश की तस्बीर, Desh

Desh Ki Tasveer-2 (देश की तस्बीर -2)

Desh Ki Tasveer-2 (देश की तस्बीर -2)

आज फिर देश (Desh) की तस्बीर तुम्हे मैं दिखता हूँ  ,
हर सरकार ने सपना गरीबी मिटाने  का दिखाया है  ,
लगता है अब फिर से चुनाब निकट आया है ,

 

क्या पता नई सरकार , न्य चेहरा ,गरीबों के लिए कुछ नया लेकर आया है .,
वैसे नेता तो बादे हजार करते हैं  ,
अब तो लोग बोट डालने से भी डरते हैं ,
पता नहीं कौन   ईमानदार  कौन  आस्तीन का सांप बन  कर आया है .,
लगता है अब…………………

 

सब ने मिल कर देश को लूटा है
बिकास का लगा हर नारा अकड़म झूठा है
खाली कटोरा जनता को थमाया है
चुनाव आने पर हर बार जनता को भरमाया है
लगता है अब…………………
अब तो बिकास के नाम से ही डरते हैं
क्यूंकि झूठे वादे ही अब लोग करते हैं
बस किसी तरह जीते हैं घूंट आंसुओं के पीते हैं
सरकार ने तो जनता को ना जाने क्या क्या सपना दिखाया है
लगता है अब…………………

 

पूंजीपतियों का अधिकार बड़ा है,
आम नागरिक  तो बहीं खड़ा है ,
यूं तो कहने को भारत अड्बांस बड़ा है
बिकास तो बस किताबों में बंद पड़ा है
पर मानसिकता से बिक्लांग है ,
अड्बांस तो केबल फ़ोन हुआ है ,
केवल 2जी से 4जी अब 5जी का सपना दिखाया है
लगता है अब…………………

 

हर एक इंसान फ़ोन मैं ब्यस्त हुआ है
Whatsapp और facebook  पर Youth लगा है ,
किसान इतनी ठण्ड में, घर से बाहर खड़ा है,
कहाँ से बिकास होगा, अन्नदाता सड़कों पर पड़ा है
कुछ मतलबखोरों ने इसको खालिस्तानी बताया है
लगता है अब…………………

 

Time for Election

 

News Channel भी कहाँ इसको दिखाएगा
वो तो सिर्फ सरकार के ही गुण गाएगा
इसने कब मरते मजदूर को खबर का हिस्सा बनाया है
किसने पहने कैसे कपड़े, और ग्लैमर का बीएस चेहरा ही दिखाया है
लगता है अब…………………

 

तन से पहराबे से अमीर है ,पर मन से बहुत गरीब हैं ,
खुद को मोर्डन कहते हैं यहाँ के लोग कितने बदनसीब हैं
चारों  तरफ दिखाबा है ,अब कौन से अबतार की आस है ,
लोगों को तो छोड़ो परे तुम्हारा कर्म तो तुम्हारे पास है
तुमने क्यूँ अपने ज़मीर को मार मुकाया है
लगता है अब…………………

 

एकता में ही बिकास है ,मानबता हमारा धर्म यह सोच बहुत खास है ,
तोड़ नहीं सकता कोई हमारी एकता को क्यूंकी हर किसी का मनोबल तो उसके पास है
जब अपना फर्ज तुम पूरी इमानदारी से निभाओगे ,
देश को तरक्की की राहों पर बढ़ता पाओगे,
कहाँ कोई नेता इस बात को आसानी से समझ पाया है
लगता है अब…………………

 

छोड़ दो सहारा लेना दूसरों का, खुद पर बिश्बास करो
करो थोड़ी Desh की सेवा और देश का विकास करो
वोट मांगने के बिना भी वोट खुद को ही पाओगे
देश के सच्चे हितकर जिस दिन बन जाओगे
सोचो ऐसा ज़िंदगी में तुमने जो कर्म कमाया है
लगता है अब…………………

 

इसे भी पढ़ें :-
  1. किसान 
  2. किसान आंदोलन 
  3. मजदूर 

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