Dhiyan, man ke par

Dhiyan (धियाँ)

Dhiyan (धियाँ)

 

Dhiyan (धियाँ)   हुंदीयाँ ने  रबड़ दा वावा
ते लगियाँ कालियाँ  बाबल दे बेहड़े
धियाँ हुंदी रौनक घर दी
एहना नाल ही ख़ुशीयाँ खेड़े

 

मापेयाँ दे घर हमेशा  रक्खादियाँ सज़ा  के
मुश्आकिल कोई भी आण ना दिंदियाँ
ख़ुश रहन दे नुस्ख़े भी दस्दियाँ ने
दुःख नू डेरा लाऊण ना दिन्दियाँ
बड़े बड़े दुःख सेह लेंदिया हस के

 

वीरयाँ दी ता एह हुँदी जान
चाहे कुज नई करदा ब्यान
होवे ज़रूरत कदे भी एहनू
ता भी बहण  ही बचांदी एहनू

 

मुश्किल घर विच कोई भी होवे
धी कीसे नू रौऊण ना देवे
धी दी जून बड़ी हुंदी ए औखी
पर एह कड़े ना थाकदी सौखी

 

 

खुद अंदरों चाहे टूट जावे
पर खुश रखे सारा परिवार
आण ना देबे कड़े भी एह
किसे रिश्ते दे विच तकरार

 

 

धियाँ  नूं कहंदे  सारे धन बेगाना
पर एह ही हुंदी असली खजाना
एह्नू कदे ना कुख विच मारो
मेरी एह गल ज़रा विचारो

 

ते हुन अर्ज़ी  मेरी धी दे अग्गे
दाग इज्ज़त ते कदे  ना लग्गे
मापेयाँ दे बल तक्कीं धिये
फेर कदम  तूं चक्कीं धिये

 

हुण अरदास भरावां अग्गे
माफ़ करीं तैनू बुरा जे लग्गे
अपणी धी, भैण, ते साथी जिद्दां दा चाहबो
खुद भी तां कर्म  उद्दां दा ही कमाबो

 

मापे चाहन्दे जे धियाँ सुखी बसण
तां नूहां नूं ओह भी सुखी रखण
नूंह ते धी विच जद फर्क ना रहेगा
फेर एह जग सुंदर होवेगा

 

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  2. अपने पराए
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  5. परिवार
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