रुलाया गया हूँ मैं, Dukh

Dukh (दुःख)

Dukh (दुःख)

दुनिया की बोलदी  ओहदी  इक   ना  सुण तू

जेहड़ा लग्गे चंगा तैनू   औस राह नू  चुण  तू

 

लख  जमाने दा पूर  लै  तू भावे  पख

मौका पैण ते बदल जान्दी एहदी अख्ख

 

 

दुनिया बनाउणियां  बस गल्लां   ऐथे जाणदिए

पर किसे दे दुःख नूं ना कदे पहचाण दिए

 

 

जिहना रुखाँ दिया लोकां  ने छावाँ  होण  माणियाँ

ओहना रुखाँ दियाँ  लोक्की  छाँग  दिन्दे  ने टाहनियाँ

 

रोलदे अमीर रेह्न्दे , मिट्टी च गरीबाँ नूं

दोष दे देके बस  ओहना देआं  नसीबाँ  नूं

 

रोटी दे टुक जांदे एहना दिया छाबियाँ च सुक

पर पूरी करदे नेईयों सजणा एह किसे दी  भुख

 

दुनिया बनाउणियां  बस गल्लां   ऐथे जाणदिए

पर किसे दे दुःख नूं ना कदे पहचाण दिए

 

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  1.  रुलाया गया हूँ मैं 
  2. शायरी 

 

 

 

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