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परिवार – कहानी हर घर की-2

       परिवार – कहानी हर घर की-2

परिवार – कहानी हर घर की-2  परिवार कहानी का दूसरा भाग है |

इस  कहानी के पहले भाग में आपने अभी तक पढ़ा कि सुरेश की नौकरी लगती है।

फिर नौकरी की परेशानियों से निकलने का रास्ता उसको अपने मां से मिलता है।

थोड़े दिनों बाद सुरेश की शादी रेखा से हो जाती है। जबसे रेखा की मौसी उसको मिलकर जाती है, तबसे रेखा में बदलाव आने शुरू हो जाते हैं।

ऐसे ही एक दिन

घर का कुछ समान और सब्जियां वगैरह आनी थीं। शीला ने रेखा रेखा को कहा:-

शीला:- बेटी चलो जरा बाज़ार होकर आते हैं। कुछ समान भी लेना है। दोनों चलते हैं ।
तुम भी थोड़ा घूम लोगी बाहर और मेरा भी में लगा रहेगा।

 

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रेखा:- नहीं मां। बाहर देखो कितनी धूप है। मेरा सारा चेहरा खराब हो जाएगा। आप जा आओ।
वैसे भी आप मेरी सुंदरता के बारे में समझ नहीं पाओगे। क्यूंकि आप तो खुद सुंदर नहीं हो।

शीला को बहुत अटपटा सा लगा। खैर बो जाने के लिए तैयार होने लगी। जैसे ही वो घर से निकलने लगी रेखा ने उसको आवाज़ दी।

रेखा:- मां!

शीला:- हां बेटी कहो ।

रेखा :- मेरे लिए यह क्रीम लेते आना।

रेखा ने क्रीम का नाम लिखकर शीला को पकड़ा दिया। शीला उसको लेकर चल पड़ी। शीला पैदल बाज़ार की ओर निकल पड़ती है।

अब आगे

पैसे बचाने के चक्कर में शीला पैदल ही जाती है। पैसे  बचाने की उसकी पुरानी आदत थी।

वो बाज़ार में पहुंचती है। पहले को अपनी बहू के लिए क्रीम खरीदने का फैसला करती है। शीला कॉस्मेटिक की दुकान पर पहुंचती है ।

शीला रेखा द्वारा दी गई पर्ची को दुकानदार को पकड़ाते हुए:-

शीला:- भैया ! ये दे देना।

दुकानदार:- अरे आओ बहनजी! कैसे हो?

शीला:- ठीक हूं भैया।

 

दुकानदार:- बहनजी ! एक और क्रीम आई है नई। उसका दाम भी इससे बहुत कम है।

शीला:- लेकिन मुझसे तो यही मंगवाई है बहू ने।

दुकानदार:- ये सस्ती वाली ले जाओ। अच्छी है। बहू एक बार लगाएगी तो उस महंगी क्रीम को भूल जाएगी।

 

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शीला :- ठीक है भैया ! देदो फिर।

दुकानदार से क्रीम लेकर उसको पैसे दे देती है।

अब शीला सब्जी वाले के पास जाती है। सब्जी वाले से सब्जी खरीदती है ।

अब वो किराने की दुकान की तरफ रवाना हो जाती है।

किराने वाले के पहले के भी कुछ पैसे बचे हुए थे। उसने समान डलवाया।

दुकानदार:- बहनजी और बताओ सुरेश कैसा है?

शीला:- ठीक है भैया आपकी दुआ से ।

दुकानदार:- और बहू वो तो ठीक रहती है? सुना है उसकी मौसी आयी थी।

शीला :- बहू भी ठीक है। हां आई तो थी एक दिन।

दुकानदार:- बहनजी! जरा संभालकर रखना बहू को उससे।

शीला:- क्यूं क्या हुआ?

दुकानदार:- उसका ससुराल मेरी मौसी के पड़ोस में ही है। पूरे मोहल्ले में झगड़े पड़वा रखे हैं उसने।

 

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शीला:- तो भैया पहले क्यूं नहीं बताया? हम रिश्ता ही नहीं करते।

दुकानदार:- अरे बहनजी! अब इसमें आपकी बहू की क्या ग़लती? बो तो बहुत अच्छी है।

आप कहीं ऐसा ना करो इसलिए ही तो बताया नहीं। और वैसे भी आपको उससे क्या लेना? बहू ठीक होनी चाहिए।

बस उसको थोड़ा बहू से दूर रखना। पता चला उसकी बातों में आकर अपना नुकसान कर बैठे।

उसकी बातों में तर्क तो था |

शीला:- हां भैया! ये तो ठीक कहा तुमने| चलो अब ध्यान रखूंगी|

अब ये बताओ कितने पैसे हुए?

दुकानदार:- पैसे कौन सा भागे जा रहे हैं? 2ह्ह्ह 000 ही हुए हैं| बाद में दे देना अगर नहीं है तो|

शीला :- नहीं भाई! बो बात नहीं है| ये लो 3000 काट लो|

दुकानदार:- अरे 2000 ही हुए|

 

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शीला:- लेकिन 1000 पिछले भी रहते हैं ना|

दुकानदार:- बहनजी! सच बोलूं तो मुझे तो याद भी नहीं था|

शीला:- लेकिन मैंने तो देने थे। इसलिए मुझे याद था।

दुकानदार:- इसलिए तो आपके पैसे लिखता नहीं कभी।

आप खुद ही दे देते हो।

शीला:- चलो भैया आपकी मर्ज़ी| अच्छा अब चलती हूं|

दुकानदार:- अरे धनिया! बहनजी का समान गाड़ी में रखो और घर छोड़ आओ|

धनिया :- ठीक है ।

 

बहां  पर काम करने वाले व्यक्ति का नाम धनिया था  और रिक्शा भी चलता था|

धनिया समान रिक्शा में रखता है और शीला को उसमें बिठाकर चल पड़ता है|

 

घर पहुंचकर शीला सारा समान रखवाती है। धनिया को चाय पिलाकर पैसे देती है | अब धनिया बहन से चला जाता है|

 

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इतनी देर में रेखा की भी नींद खुल जाती है| बो भी बाहर आती है| आते ही बो शीला से पूछती है:-

रेखा:- मांजी ! मेरी क्रीम ले आए?

शीला:- हां बेटी! ये लो|

ये कहकर शीला क्रीम का पैकेट निकालकर रेखा को देती  है।

रेखा:- लेकिन जो मैंने मंगवाई थी ये वी नहीं है।  ये तो कोई और है।

शीला:- हां बेटी! दुकानदार ने कहा ये उससे अच्छी है और सस्ती भी थी। इसलिए ये ले अयी।

 

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बहु अब अपनी सास को क्या कहेगी ?

वो शीला की बात मान लेगी या फिर कुछ और होता है |

इन सब बातों को जानने के लिए हमारे साथ बने रहिये |

परिवार कहानी के इस भाग ( परिवार-2) में बस इतना ही। परिवार-2 का शेष भाग जल्द ही परिवार – 3 आपके पास होगा।

तब तक के लिए नमस्कार!🙏🙏🙏

यह भी पढ़ें :-

  1. मैं घर और ऑफ़िस-1 | Me Ghar Aur Office-1
  2. परिवार – कहानी हर घर की-3
  3. मैं घर और ऑफ़िस-2 | Me Ghar Aur Office-2
  4. परिवार – कहानी हर घर की-4

 

 

About R.K.Jaswal

R.K.Jaswal
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