आशिक (Lover) हूँ पर आवारा (Loafer) नहीं

आशिक (Lover) हूँ पर आवारा (Loafer) नहीं

आशिक (Lover) हूँ पर आवारा (Loafer) नहीं

आशिक (Lover) हूँ पर आवारा (Loafer) नहीं
तेरी मोहब्बत के बिना कुछ गवारा  नहीं
तू मुझे कभी खुद से अलग ना करना क्यूंकि
तेरे बिना मेरी ज़िंदगी का गुज़ारा नहीं

किसी और की अब मुझे ज़रूरत नहीं
इस दिल को केवल तेरी चाहत है
तू नहीं जो सामने मेरे तो बेचैनी सी है
सामने है मेरे तो राहत है
तेरी आँखें हैं एक समन्दर गहरा
जिसका कोई किनारा नहीं

सूरज की तेज़ गर्मी को जो थाम लें वो
जुल्फें हैं तेरी या फिर घनघोर घटाएँ हैं
मेरे लिए किसी सौगात से कम नहीं
ये जो तेरी मुझपर जफ़ाएं हैं
और ये दिल तुझे दे दिया तो बस दे दिया
फिर कुछ सोचा नहीं कुछ विचारा नहीं

होंठ हैं गुलाबी या गुलाब की पंखुड़ियाँ हैं
रात है अंधेरी और तू मेरा सवेरा है
चाहत तेरी ने कर डाला है अंधा मुझको
तू ही चितचोर है और तू ही मेरे दिल का  लुटेरा
हाँ कर या तू करदे माना तेरी मर्ज़ी क्यूंकी
तेरे जवाब पर टिका अब आने वाला कल हमारा है

हम तो तेरे हो चुके और ये दिल हमारा रहा नहीं
हमने पढ़ लिया तेरी आँखों में उस अलफाज को भी जो तुमने कहा नहीं
तू छोड़ कर ना चले जाना हमें इस बे मुरोवत दुनिया में अकेले
क्यूंकी तेरे विछोड़ा जाएगा हमसे सहा नहीं
हमने तो बंदगी छोड़ दी खुदा की भी जिस दिन से तू हमारा हुआ
करते हैं याद सिर्फ तुझको खुदा को तो हमने पुकारा नहीं

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About Priya Bhatiya

Priya Bhatiya
मैं Priya Bhatiya जम्मू की रहने वाली हूँ। मुझे शेर - ओ - शायरी, गज़लें और कवितायें लिखना और पढ़ना दोनों बहुत पसंद हैं। फिर मुझे Man Ke Par website net पर मिली । अब मैं अपनी लिखी हुई रचनाएँ मन के पर वैबसाइट के माध्यम से लोगों तक पहुंचा सकती हूँ । धन्यवाद

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