रिक्रूट की लाइफ

रिक्रूट की लाइफ

रिक्रूट की लाइफ

रिक्रूट की भी क्या लाइफ है ,

ना  वच्चे हैं पास ना  वाइफ है ,

पता नहीं कब सुबह कब शाम हुई ,

हर रोज का काम बही ,

 

उस्ताद हमें  अनुशासन हमें सिखाते हैं  ,

पर हम बार बार गलती करते जाते है ,

सर्वाइव करना हर हाल में सिखाते है ,

हम कर गलती सज़ा हम खाते है बार बार सर टिकाते है ,

तब लगा शायद .तभी तो बो हमारे बाल बो कटवाते है ,

 

सब एक जैसे नजर आते है कसम से खुद को आईने मै नहीं पहचान पाते हैं  ,

जैसे पता चला कल 16 km रेस  होगी .

कुछ का पेट दर्द .तो कुछ को बुखार होगा ,

सब को है पता डॉक्टर भी  त्यार होगा ,

नित नया  बहाना बनाते हैं पर हर बार पकडे जाते है ,,

 

रोज जूता ड्रेस चमकाते हैं पर शाम तक धुल में लिपटे नजर आते है ,

ये हमारा रोज का बर्क है ,हम हैं  देश के जबान ना  कोई क्लर्क है ,

देश को हम पर हम को तिरंगे पर मान  है .देश के लिये तो हमारी जान कुर्बान है ,

एक एक दिन किसी तरहा बिताते है ,9 महीने  रगडा खाते है ,

तब एक नौजबान बन पाते है , फिर जाकर फौजी हम कहलाते हैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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