इसका नाम है प्यार

हुआ पैदा तो रोया भूख से

पिलाया दूध माँ ने तो आया चैन करार

तब मैंने सोचा बस इसका नाम है प्यार

फिर दिए खिलौने मुझको तो

झूम उठा सुनके उनकी खनकार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

फिर पकड़ी उंगली माँ ने

चलना सिखाए कदम दो चार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

 

कंधे पर उठाया पिता ने

दिया जब जब भी दुलार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

हुआ जवान तो बदली फितरत

फिर हो गई आँखें चार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

मिल गई पद्वी पढ़ लिख कर

हर कोई लगा करने जय जय कार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

 

हुई शादी बने रिश्ते नाते

हर तरफ मिलने लगा सत्कार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

हुए फिर बच्चे पैदा

किया पोषण उनका देके प्यार दुलार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

 

फिर आया बुढ़ापा लाचारी ले कर

तब सेवा करता था परिवार

तब मैंने सोचा  बस ……………….

 

 

पूछा किसी ने कौन जायेगा साथ तेरे

किसपे है तुझको इतवार

तब समझ में आया ये तो है दुनिया का प्यार

 

दिया सत्गुरु ने ज्ञान तो मन खिल उठा

जब मिला साकार में निराकार

तब जाके समझ में आया किसका नाम है प्यार

 

था नहीं गुण कोई अवगुणों से भरा था

करके माफ गलती को सीने से लगाया हर बार

तब जाके समझ में आया इसका ………………….

 

यह भी पढ़ें :-

  1. किसान
  2. ना अब दिल दुखाएंगे
  3. Poetry

 

 

 

 

 

 

 

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R.K.Jaswal

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