मन के पर | Man Ke Par, Man Ke Paar

Man Ke Par | मन के पर

Man Ke Par | मन के पर

इन्सान के विचारों पर कितनी सारी चीज़ें निर्भर करती हैं।  Man Ke Par | मन के पर शब्द तब सार्थक हो जाता है जब कोई अपने विचारों का दायरा बढ़ा लेता है। ऐसे ही अपने विचारों को खुला आसमान देकर मन के पर की सहायता से,
मन के पार (Man Ke Paar) जाने की कहानी है। इस कहानी की नायिका का नाम है खुशबू।
खुशबू एक देहाती गाँव की रहने वाली थी। उसका परिवार बहुत गरीब था।
बचपन्न से ही खुशबू को अज्ञात वस्तुओं के बारे में जानने तीब्र इच्छा रहती थी।
उसके इस गुण को बहुत सारे अध्यापक सराहा भी करते थे।
बहुत सारे इस बात से चिढ़ भी रखते थे। उनको यह लगता था कि खुशबू उनका मज़ाक उड़ाती है।

कई बार तो खुशबू को बहुत उदासी का एहसास होता था। वो सोचती थी कि वो अपनी इस आदत को बदल ले। लेकिन वो कहते हैं ना!
कि पक्के घड़े पर मिट्टी नहीं चढ़ सकती। बस यही सब खुशबू के साथ भी होता था।
खुशबू अक्सर सोच में ही डूबी रहती थी। उसकी CLASS में एक और लड़की थी जिसका नाम तह नेहा।
नेहा भी पढ़ने लिखने में बहुत अच्छी थी।

 

खुशबू और नेहा के विचार

नेहा और खुशबू में काफी समानताएं थीं। वो दोनों किसी भी मामले में एक दूसरे से कम नहीं थीं।
उन दोनों में अगर कोई अंतर था तो वो था सोच का।
एक जैसी होने के बावजूद दोनों के विचार एक दूसरे से अलग थे।
उनके विचार तो मानो magnetic field के South और North पोल थे।
खुशबू को हमेशा कुच्छ नया सीखना होता था तो नेहा को जितना बताया जाता था उतना ही काफी था।
नेहा को जितना बताया जाता था वो उसको और अच्छे से समझने की कोशिश करती थी।
खुशबू को उससे अधिक सीखना होता था।
नेहा को किसी से कुछ लेना देना नहीं था तो वहीं खुशबू को बर्दाश्त नहीं था की कोई उससे आगे निकले।
खुशबू कोई बात किसी को नहीं बताती थी। नेहा को जितना पता होता था वो सबसे साथ अपना knowledge शेयर करती थी।

उनकी teacher

उनकी एक teacher थी जो इन दोनो को अच्छी तरह से समझती थी।
उसको उन दोनों की खूबियों और खामियों की ज्ञान था।

धीरे धीरे समय बीतता गया। खुशबू में अपनी खूबी को लेकर घमण्ड आता गया।

Teacher’s Day पर दोनों को शिक्षा

ऐसे ही इस बार का Teacher’s Day नज़दीक आ रहा था।
सभी students तैयारियों में जुटे हुए थे। इस दिन का function बहुत धूम धाम से मनाया गया।
इस बार इन दोनो के बजाए कोई दूसरा स्टूडेंट जीत गया।
दोनो इस बात से दुखी थीं।

उस Teacher ने उन दोनो को अपने पास बुलाया।
देखो नेहा और रेखा जरूरी नहीं कि हमारी हर कोशिश कामयाब ही हो।
कई बार हमें हार का सामना भी करना पड़ता है। अपने आप को निखारो।
अपनी सोच के दायरे को बढ़ाओ। अपने मन के पर फैलाओ, और फिर मन के पार चले जाओ।
तुम्हारी सोच ऐसी होनी चाहिए कि तुम हर हाल में संतुष्ट रह सको।

बदलाव

टीचर की इस बात का नेहा पर बहुत गहरा असर हुआ। खुशबू ने सोचा टीचर पागल हो गई है। उसने इस बात को वहीं छोड़ दिया।
नेहा टीचर की बातों पर अमल करने लगी थी। उसमें आते बदलाव को देखकर टीचर भी बहुत खुश थी।
अब नेहा के मन के पर मजबूत हो चुके थे । वो बहुत सरलता से अपने आप को निखार पा रही थी।
नेहा भी अब नई नई चीज़ें सीखने लगी थी। लेकिन उसने अपना ज्ञान दूसरों से सांझा करना नहीं छोड़ा।
उधर खुशबू भी जी तोड़ मेहनत कर रही थी अपने तरीके से। उसने अपने आप को और अधिक सीमित कर लिया।

अब उन दोनों की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। दोनों ने प्रशासनिक पद के लिए परीक्षा दी। दोनों exam तो क्लियर कर गईं लेकिन interview में नेहा को सफलता मिली।
खुशबू बहुत परेशान हो गई। उसने इसकी जांच का आग्रह किया।
जब सभी results सामने आए तो वो समझ गई कि उसमें क्या कमी थी। वो अपनी संकुचित सोच के कारण सफल नहीं हो पाई थी।
नेहा ने उसे समझाया कि ज्ञान तो बांटने से बढ़ता है। दूसरों को समझने के लिए हमें उनसे मिलना जुलना पड़ता है। जरूरी नहीं के हर बार हम ही सही हों।
यह बात तो हम तभी समझ पाएंगे ना जब अपने विचार दूसरों से सांझा करेंगे।

खुशबू अब सारी बात समझ चुकी थी। उसने नेहा को गले लगाया और खुद में बदलाव लाने का वादा भी किया।

Moral of the story

तो दोस्तो हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि
अपने विचारों और ज्ञान को दूसरों से सांझा करना चाहिए। अपनी सोच के दायरे को बढ़ाना चाहिए। ताकि मन के पर (Man ke Par) फैलाकर हमारी सोच सकारात्मकता की उड़ान भर सके।

 

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About Priya Bhatiya

Priya Bhatiya
मैं Priya Bhatiya जम्मू की रहने वाली हूँ। मुझे शेर - ओ - शायरी, गज़लें और कवितायें लिखना और पढ़ना दोनों बहुत पसंद हैं। फिर मुझे Man Ke Par website net पर मिली । अब मैं अपनी लिखी हुई रचनाएँ मन के पर वैबसाइट के माध्यम से लोगों तक पहुंचा सकती हूँ । धन्यवाद

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