ना अब दिल दुखाएंगे

किसी का ना अब हम दिल दुखाएंगे!
किसी पर ना अब हम हक जमाएंगे

घर के बड़ों ने तो सिर्फ नाम रख दिया।
अब नाम और पहचान हम खुद ही बनाएंगे।
रहते हैं कायारुपी किराए के मकान में,
रोज सांसो को बेचकर किराया हम ही चुकाएंगे।
किसी का …………

बुरा कह रहा है जो कोई हमें उसे कहने दो,
हमारी सोच को और बेहतर हम ही बनाएंगे।
जो सच्चे मन से करेगा याद हमें,
उसके दिल में घर हम ही बनाएंगे
किसी का …………

पता है हमें खुद के सहारे शमशान तक नहीं जा सकते,
इसलिए इस जमाने में हम सच्चे दोस्त ही बनाएंगे।।
पलकों को बंद कर जब भी देखना चाहोगे,
सामने हर पल सिर्फ हमें ही पाओगे।।
भरोसा तो इन सांसों का भी नहीं यार,
वादा है अंतिम सांस तक साथ हम ही निभाएंगे
किसी का …………

हम को पता है हमारे कर्म कैसे हैं इसलिए,
गंगा जी के घाट पर भीड़ नहीं लगाएंगे
किसी पर ना अब हम हक जमाएंगे
किसी का …………

 

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