बच्चपन-2

बच्चपन-2

बच्चपन-2 चला गया बच्चपन अब ज़बानी का आग़ज हुआ , शुरु एक नया अध्याय हुआ ,धीरे धीरे बुधि का बिकास हुआ , कोमल तन का रूप यूँ बदला ,एक नये जोश का अबतार हुआ पहले स्कूल ,फिर कालेज ,तब बढ़ने लगा जर्नल नालेज  , पहले माँ ,बाप ,दोस्त ,फिर सीधा …

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एक शख्स

एक शख्स

एक शख्स को ना अपनी खुशियों की फिक्र है ना अपने गमों से उसे गिला है खुश रहता है हर हाल में वो साहब एक शख्स जो कल रात मुझे मिला है। अपना बनकर दिया किसी ने धोखा उसको फिर भी  मुस्कुराकर कर रहा था माफ़ उसको कल रात इस …

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नानी मां का वो गांव

गाँव, gaanv,गांव

नहीं भूला हूँ मैं आज भी नानी माँ का वो गांव । कितना सुखमय बीता मेरे बचपन का वो पड़ाव। ग्राम्य जीवन दुष्कर था पर नहीं था वहाँ तनाव॥   वो कच्ची थी हवेली जहाँ पर खेली आंंख मिचोली। मेरी प्यारी नानी थी वो अति सीधी और भोली। बहुत मिली …

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सतगुरु

true master,दास दाता

सतगुरु ना कुछ मांगता है ना कुछ चाहता है , ये तो बस प्यार सिखाता है बता कर रास्ता गुरसिखी का  उस पर चलना सिखाता है , गिरा कर दिबार नफरत और मजहब की , इन्सान को इन्सान बनाता है ,क्या करू सिफत अपने सतगुरु की , ये तो धरती …

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शराबी

शराबी

आज एक शराबी देखा रूप जिसका नबाबी देखा बिना ताल के झूम रहा था ,जन्नत  में यों घूम रहा था , आंखे लाल बिखरे बाल ,कपढ़े उसके सनें हुये थे ,कीचड़ मैं पुरे रमें हुये थे , बिना टाई बो बकालत करता फिरता सब पर  रोभ  झाड़ता कभी ,राजनितज्ञ  तो …

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ज़रूरत किरदार की

ज़रूरत किरदार की

बस ज़रूरत किरदार की है था सब कुछ तेरे पास ऐ इन्सान फिर क्या  ज़रूरत थी दीवार की छोड़ कर दामन नेकी का इस बुराई के दीदार की मुझसे कोई पूछे तो तुझे ज़रूरत थी किरदार की   छीन लीं खुशियां तूने मासूम दिलों की ना जाने  लहू कितनों का …

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अरदास

इंसानों में पाया है

इतनी सी अरदास  है दाता , तूं मालिक मैं दास हूँ दाता , मैं मेरी का भेद मिटादे , दाता अपने चरनी ला दे , हर बेले जामा तेरा नाम ध्याए , मन चों मेरे पाप मिटाई ,, नं तेरे कोई नाम तो ऊँचा , नं तेरे कोई काम तों …

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दास बनाकर रख लो दाता | Daas Banaakar Rakh Lo Data

true master,दास दाता

दास (Daas) बनाकर रख लो दाता(data) मैं मेरी का कोई मोल नहीं , तूं पारस है बख्शनहार तेरे दर ते थोड नहीं , मन है मेरा इक उड़ती पतंग जिस मैं कोई डोर नहीं , दिया है तुमने हद से ज्यादा ,मन मैं फिर भी थोड़ नहीं Daas बना कर …

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जिन्दगी में

जिन्दगी-में

कई आते है कई जाते है जिन्दगी में , कुछ हँसाते हैं  कुछ रुलाते हैं ज़िंदगी में कुछ  अपना बना कर छोड़ जाते है , पर कुछ खास होते है ज़िदगी में , पर कुछ सांसे बन कर बस जाते है इस ज़िंदगी में ,कभी सोच बन कर , तो …

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कोई कहे हिन्दू कोई कहे मुस्लमान

हिन्दू मुस्लमान

कोई कहे हिन्दू कोई कहे मुस्लमान , इस जग मैं मिला नहीं ऐसा जो कहें ऐसा , मैं हूँ इन्सान , जब बनी ये दुनिया तब बना इन्सान , फिर कहाँ से आया  ,ये हिन्दू ,कहाँ से आया मुस्लमान , बनाने बाले ने तो बनाया था ,बस इक इन्सान , …

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