बच्चपन गरीब का-2

बच्चपन गरीब का-2

बच्चपन गरीब का-2

बच्चपन गरीब का इस बच्चपन गरीब का-2 भाग में आपका स्वागत है।

इस कहानी की पिछले भाग में आपने पढ़ा कि रोहन सरकारी नौकरी प्राप्त कर लेता है। वो नेहरू प्लेस दिल्ली जाता है।

वहां पर वो बच्चों को देखता है और अपने बचपन की यादों में खो जाता है। वो सोच रहा होता है कि कैसे वो पैदल स्कूल जाते थे, और अमीर बच्चे गाड़ी में।

अब आगे

रोहन सोच रहा होता है कि :-

हमारा भी बहुत मन करता था गाड़ी में बैठने का। खैर! हम उन बच्चों को देखकर खुश होते थे। हम उनको हाथ हिलाते थे और ताली बजाते थे।

उनके पास बहुत अच्छी स्कूल की वर्दी और जूते हुआ करते थे। हमारे पास बाथरूम चप्पल होती थी।

हमारा भी बहुत मन करता था कि उनके जैसे जूते पहने। उनकी तरह वर्दी  हो। लेकिन क्या कर सकते थे? गरीब थे ना! हर बात पर में मसोस कर रह जाते थे।

एक बार मेले में जाना था। तो पिताजी से पैसे मांग बैठा।

पिताजी के पास मुझे देने के लिए 10 रुपए भी नहीं थे। आप सोच सकते हो मेरे मन की हालत था क्या होगी।

खैर! रोता रहा । खुद ही चुप हुआ। रात को खाना खाया और सो गया। अगले दिन सभी अपने खिलौने दिखा रहे थे। मैं क्या करता?

मैंने भी फेंकना शुरू कर दिया।

अरे गौरव! यार कल ना जलेबी और पकौड़े बहुत खा लिए। रात को पेट में दर्द हो रहा था।  फिर मैंने एक बड़ी बंदूक खरीदी। पता है वो 700 रुपए की थी। तभी दूसरा दोस्त अमन आ गया:-

अमन:- नहीं रोहन ! वो तो 850 रुपए की थी। मैंने भी खरीदी है।

मैं:- अरे अमन! तुमको उसने ठग लिया। मैंने 700 रुपए में खरीदी।

सब अमन पर हंसने लगते हैं। मैं भी हंसना शुरू कर देता हूं लेकिन खुद पर।

ऐसे ही हमारे चार पांच दिन निकल जाते थे।

उस समय स्कूल में स्लेट और तख्ती हुआ करते थे। स्याही नहीं खरीद सकते थे ।  इसलिए कभी किसी चीज़ से बनाते थे तो कभी किस चीज़ से।

एक वो ज़माना था जब स्कूल की फीस के लिए तीन रुपए नहीं होते थे। और एक ये टाइम है जब 3000 की कोई value नहीं है।

 

ये सब सोचकर रोहन मुस्कुरा भी रहा था और उसकी आंखें भी भर आईं थीं । ऐसा होता भी क्यूं नहीं। आखिर उसने तो जिया था बच्चपन गरीब का -2|

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धन्यवाद

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  2. इन्सान की फितरत | Insan ki Fitrat
  3. बच्चपन | Childhood
  4. Teri Yaad | तेरी याद
  5. बच्चपन-2

 

 

 

 

 

About R.K.Jaswal

R.K.Jaswal
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2 comments

  1. Avatar

    Beautiful lines

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