ये दुखी बो दुखी

ये दुखी बो दुखी दुखिया सारा संसार है ,चरों तरफ फैला हाहाकार  है ,

नफरत है भरी सब के दिलों में ,शब्दों में  कड़वाहट का इजहार है ,

भाई भाई का दुश्मन है बन बैठा जमीन के इक छोटे से टुकड़े के लिये ,

खो चुका  है कहीं  भाईचारा और प्यार है ,टूट कर बिखर गये परिबार हैं ,

मतलब की दुनिया मतलब का अब प्यार है ,घर हुये पक्के तो रिश्ते कच्चे हो गए ,

,सिकुड़ते जा रहे परिबार है ,इस मोर्डन ज़माने में  ,टेक्नोलॉजी के पैमाने में  ,

छोटा हो गया संसार है ,सुख सुबिधा है सब ,पर मन में  ना  शान्ति  है ,

क्यू की पहले चाचा चाची हुआ करते थे  अंकल अंटी नहीं ,

पहले घर  में बड़ों का  आदर ,मेहमानों का सत्कार था ,

अब सब कुछ मोर्डन हुआ ,दिखाबा और परचार है,

अब तो सब कुछ सपना सा लगता है , पता नहीं चलता कौन  पराया कौन अपना है,

जिस पर करो भरोसा बो ही तोड़ देता है बक्त आने पे मुह मोड़ लेता है

दोस्ती सब से महान होती है ,हर दोस्त होता है कमीना ,

पर जब बात आती है दोस्ती पर तो जान भी कुर्बान होती है ,,

 

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