टाइम फॉर इलेक्शन

टाईम  है वोटों का दारू और नोटों का (टाइम फॉर इलेक्शन),

बादे किस्से  कहानियों का वोटर को लुभाने का ,वोट पाने का ,

 

फिर पांच साल मुहँ ना दिखाना है ,

वादा एक भी नहीं निभाना है ,

कर बदा झूठा जनता को उल्लू  बनाना है,

 

इलेक्शन एक ऐसा त्यौहार है   जो आता पांच साल  में एक बार है ,

आफर बड़े बड़े सब देते , करतेअपना प्रचार है  ,

चार दिन की चांदनी फिर जनता का खून चूसने  को त्यार हैं ,

 

नेता लोग आपस में पकड़ते है गर्दन एक दुसरे की हमारे सामने ,

पर आपस में उनका बहुत प्यार है ,जनता से किसी को नहीं कोई बासता ,

क्यू की सब को  तो मनी से प्यार है ,

 

भोली भली जनता तो हर बार धोखा खाती है ,बाद में  जनता बहुत पछताती  है ,

अब तो जनता जाग जाओ ,लालच में ना तुम आओ ,

जाति धर्म ,सब अनेक ,,,, है,पर मानब धर्म एक है ,

इंसानियत धर्म निभाना है ,अगर देश को बचाना है ,,,,,,,,,,,,

 

टाइम फॉर इलेक्शन के साथ यह भी पढ़ें :- 

  1. किसान 
  2. किसान आन्दोलन 
  3. Purana Zamana – पुराना ज़माना
  4. निरंकार मिलादे
  5. Kehna Ya Sehna (कहना या सहना)
  6. Desh Ki Tasveer-2 (देश की तस्बीर -2)

 

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