Time-वक़्त गुज़र जाएगा…….

वक़्त (Time) हो जैसा भी जिंदगी के मंज़र मे

निकल जाएगा ऐसे जैसे लहरें समुन्दर मे

रुकता ना है यह कभी किसी के रोकने पर

चलता ही जाता है और चलता ही जाएगा

कभी है अच्छा और कभी है बुरा यह वक़्त

कभी हँसाए कभी रुलाये यह क़भी बेवक्त

 

मानो कैसा रिश्ता है इससे हमारा

पर चाहने से भी ना  क़भी हो हमारा

 

सुख और दुख हैं इसके  दो पहिये

संभल कर  इसको सहज से रहिये

 

बोले सब हमेशा वक़्त बड़ा बालबान

जो इसकी ढाल में ढल जाये वो है इंसान

 

वक़्त की कीमत तो मन को वक़्त ही सिखाता है

बिना  ठोकर लगे मन को हरगिज़ ना समझ आता  है

 

वक़्त सिखाता है सबको हर बार इक नया पड़ाव

सबको नाच नचाए गरीब  हो या हो कोई नवाब

 

कल हो सकता है वह गरीब जो आज है अमीर

ना कर ग़ुमान ऐ इंसान और ना बदल ज़मीर

 

ऐसा होता है वक़्त का पहिया जो घूमे गोल

जिसमे इंसान  बिकता ही जाता है हर मोल

 

हो जाती है गलतियाँ  हर इक इंसान से मगर

फिर पशतावे  के सिवा कुछ नी कर सकते ज़ाहिर

 

अगर निकल जाये वक़्त ना लौटता दोबारा

फिर चाहे जिंदगी भर रहेगा इसका सहारा

 

Time के साथ यह भी पढ़ें :-

  1. दुःख
  2. पहलू.
  3. पुराना ज़माना (Old Time)
  4. इंसान की ज़िन्दगी के दिन
  5. रुक जाना नहीं – Ruk Jana Nahi
  6. Sapna-सपना
  7. सतगुरु

 

 

 

 

 

 

 

 

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